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काव्य के महासागर एवं गीतों के सम्राट थे नीरज
इंदौर. कुछ ही समय के अंतराल के बीच साहित्य जगत से दो मूर्धन्य साहित्यकारों का यूँ चले जाना या यूँ कहें की दो स्ंतभों के ढ़ह जाने से साहित्यिक गलियारों में मायुसी छाई हुई है.
साहित्यिक संस्थाओं द्वारा स्व. नीरज को काव्यांजली के माध्यम से श्रद्धांजली दी जा रही है वहीं नीरज जी जन जन में भी काफी लोकप्रिय थे. उनके लिखे गीत लोगों को मुँह जुबानी याद है और वो लोगों के दिलों में बसे हुए हैं.
यही कारण है कि छोटी छोटी संस्थाओं एवं रहवासी संघों द्वारा भी अपने चहेते गीतकार को भावभीनी श्रद्धांजली दी जा रही है. ऐसा ही एक कार्यक्रम सिल्वर आँक्स काँलोली के रहवासी संघ द्वारा आयोजित किया गया. जिसमें किसी ने उनके गीतों को गाकर उन्हें नम आँखों से श्रद्धांजली दी तो किसी ने उनको कविसम्मेलन में सुनने से जुड़े संस्मरण सुनाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया.
इस अवसर पर प्रदीप नवीन एवं हरेराम वाजपेई ने उनसे जुड़े कई संस्मरण सुनाये. वहीं हरेराम वाजपेई ने उन्हें काव्य का महासागर बताया. इस अवसर पर सिल्वर आक्स काँलोनी रहवासी संघ के सदस्य रमेश दलवी, हुकुमचंद मालवीय, मुकेश इन्दौरी, मदन विश्वकर्मा, गोपाल शर्मा, नरेन्द्र शर्मा, शरद शर्मा, अनिल टाभलकर, गोविंद व्यास, सोहनलाल जोशी आदि ने अपनी भावनाएं व्यक्त कर श्रद्धांजली दी. संचालन प्रदीप नवीन ने किया. अध्यक्षता हरेराम वाजपेई ने की.


